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mahabharat 12.83.40: जो व्यक्ति छोटे से छोटे अपराध के लिए भी दण्ड पाता है और दरिद्र बना दिया जाता है, वह गुप्त मंत्रणा सुनने के योग्य नहीं है, चाहे वह मित्र भी हो और अन्य सद्गुणों से युक्त भी हो ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.83.40 
य: स्वल्पेनापि कार्येण सुहृदाक्षारितो भवेत्।
पुनरन्यैर्गुणैर्युक्तो न मन्त्रं श्रोतुमर्हति॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति छोटे से छोटे अपराध के लिए भी दण्ड पाता है और दरिद्र बना दिया जाता है, वह गुप्त मंत्रणा सुनने के योग्य नहीं है, चाहे वह मित्र भी हो और अन्य सद्गुणों से युक्त भी हो ॥40॥
 
One who is punished for even a small wrongdoing and is made poor is not worthy of listening to secret advice, even if he is a friend and is endowed with other good qualities. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)