Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.83.4-5: जो उत्तम कुल का है, जिसका सदैव सम्मान होता है, जो अपने बल को नहीं छिपाता तथा जो राजा के सुखी या दुःखी, दुःखी या घायल होने पर भी बार-बार उसका अनुसरण करता है, वह मित्र होने के योग्य है ॥4-5॥ | mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुलीन: पूजितो नित्यं न हि शक्तिं निगूहति॥ ४॥
प्रसन्नमप्रसन्नं वा पीडितं हतमेव वा।
आवर्तयति भूयिष्ठं तदेव ह्यनुपालितम्॥ ५॥
अनुवाद
जो उत्तम कुल का है, जिसका सदैव सम्मान होता है, जो अपने बल को नहीं छिपाता तथा जो राजा के सुखी या दुःखी, दुःखी या घायल होने पर भी बार-बार उसका अनुसरण करता है, वह मित्र होने के योग्य है ॥4-5॥
He who is of noble birth, who is always respected, who does not hide his strength and who repeatedly follows the King whether he is happy or unhappy, in pain or in a wounded state, is worthy of being a friend. ॥ 4-5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥