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mahabharat 12.83.39: यदि किसी व्यक्ति का पिता पहले अधर्म के कारण अपमानित होकर निकाल दिया गया हो और उसका पुत्र पिता के पद पर आदरपूर्वक नियुक्त हो गया हो, तो वह भी गुप्त मंत्रणा सुनने का अधिकारी नहीं है ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.83.39 
विधर्मतो विप्रकृत: पिता यस्याभवत् पुरा।
सत्कृत: स्थापित: सोऽपि न मन्त्रं श्रोतुमर्हति॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
यदि किसी व्यक्ति का पिता पहले अधर्म के कारण अपमानित होकर निकाल दिया गया हो और उसका पुत्र पिता के पद पर आदरपूर्वक नियुक्त हो गया हो, तो वह भी गुप्त मंत्रणा सुनने का अधिकारी नहीं है ॥39॥
 
If a person's father was earlier disgracefully expelled due to unrighteous conduct and his son has been honourably installed in his father's position, then he too is not entitled to listen to secret advice. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)