Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.83.38: जो भगवान् में भक्त है, अनेक शास्त्रों का ज्ञाता है, सबका आदर करता है और जिसे उदारतापूर्वक दान दिया गया है, वह भी यदि नया आया हो तो गुप्त सलाह सुनने के योग्य नहीं है ॥ 38॥ | mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आगन्तुश्चानुरक्तोऽपि काममस्तु बहुश्रुत:।
सत्कृत: संविभक्तो वा न मन्त्रं श्रोतुमर्हति॥ ३८॥
अनुवाद
जो भगवान् में भक्त है, अनेक शास्त्रों का ज्ञाता है, सबका आदर करता है और जिसे उदारतापूर्वक दान दिया गया है, वह भी यदि नया आया हो तो गुप्त सलाह सुनने के योग्य नहीं है ॥ 38॥
One who is devoted to God, knowledgeable in many scriptures, respected by all and who has been given gifts generously is also not fit to listen to secret advice if he is newly arrived. ॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥