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mahabharat 12.83.35: जो मनुष्य दूसरों में आसक्त है, बहुत से गुणों से युक्त है और बुद्धिमान है, वह भी यदि सरल स्वभाव का न हो तो राजा की गुप्त बात सुनने का अधिकारी नहीं है ॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.83.35 
अनृजुस्त्वनुरक्तोऽपि सम्पन्नश्चेतरैर्गुणै:।
राज्ञ: प्रज्ञानयुक्तोऽपि न मन्त्रं श्रोतुमर्हति॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य दूसरों में आसक्त है, बहुत से गुणों से युक्त है और बुद्धिमान है, वह भी यदि सरल स्वभाव का न हो तो राजा की गुप्त बात सुनने का अधिकारी नहीं है ॥ 35॥
 
Even a person who is attached to others and is endowed with many virtues and is intelligent is not entitled to listen to the secret advice of the King if he is not of a simple nature. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)