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mahabharat 12.83.32: राजा क्रोधित हो जाता है और मंत्री को उसके पद से हटा देता है और क्रोध में उसे गालियाँ भी देता है; लेकिन अंत में वह प्रसन्न हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.83.32 
संक्रुद्धश्चैकदा स्वामी स्थानाच्चैवापकर्षति।
वाचा क्षिपति संरब्ध: पुन: पश्चात् प्रसीदति॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
राजा क्रोधित हो जाता है और मंत्री को उसके पद से हटा देता है और क्रोध में उसे गालियाँ भी देता है; लेकिन अंत में वह प्रसन्न हो जाता है।
 
The king becomes furious and removes the minister from his position and in anger he even abuses him verbally; but in the end he becomes happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)