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mahabharat 12.83.31: यदि वह कपटी मंत्री राजा के गुप्त विचार जान लेता है, तो अन्य मंत्रियों के साथ मिलकर राजा को उसी प्रकार कष्ट देता है, जैसे अग्नि वायु से भरे हुए छिद्रों में प्रवेश करके सम्पूर्ण वृक्ष को नष्ट कर देती है ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.83.31 
व्यथयेद्धि स राजानं मन्त्रिभि: सहितोऽनृजु:।
मारुतोपहितच्छिद्रै: प्रविश्याग्निरिव द्रुमम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
यदि वह कपटी मंत्री राजा के गुप्त विचार जान लेता है, तो अन्य मंत्रियों के साथ मिलकर राजा को उसी प्रकार कष्ट देता है, जैसे अग्नि वायु से भरे हुए छिद्रों में प्रवेश करके सम्पूर्ण वृक्ष को नष्ट कर देती है ॥31॥
 
If that deceitful minister comes to know the secret thoughts of the king, then together with other ministers he torments the king in the same way as fire enters the holes filled with air and destroys the entire tree. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)