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mahabharat 12.83.29: जिसकी बुद्धि दोषपूर्ण है और जिसे शास्त्रों का ज्ञान नहीं है, वह केवल मंत्री का कार्य करने से सफल नहीं हो सकता। विशेष कार्यों के संबंध में उसकी दी गई सलाह तर्कपूर्ण नहीं होती ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.83.29 
केवलात् पुनरादानात् कर्मणो नोपपद्यते।
परामर्शो विशेषाणामश्रुतस्येह दुर्मते:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जिसकी बुद्धि दोषपूर्ण है और जिसे शास्त्रों का ज्ञान नहीं है, वह केवल मंत्री का कार्य करने से सफल नहीं हो सकता। विशेष कार्यों के संबंध में उसकी दी गई सलाह तर्कपूर्ण नहीं होती ॥29॥
 
One whose intellect is faulty and who has no knowledge of the scriptures cannot be successful merely by taking up the work of a minister. The advice given by him regarding particular tasks is not logical. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)