Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.83.27: इसी प्रकार जो उत्तम कुल में उत्पन्न नहीं हुआ है, वह अनेक शास्त्रों का विद्वान् भी हो सकता है, परन्तु नेताविहीन सैनिक या अंधे की भाँति वह छोटे-छोटे कार्यों में भी भ्रमित हो जाता है और उचित-अनुचित का विवेक नहीं कर पाता॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसी प्रकार जो उत्तम कुल में उत्पन्न नहीं हुआ है, वह अनेक शास्त्रों का विद्वान् भी हो सकता है, परन्तु नेताविहीन सैनिक या अंधे की भाँति वह छोटे-छोटे कार्यों में भी भ्रमित हो जाता है और उचित-अनुचित का विवेक नहीं कर पाता॥ 27॥
Similarly, one who is not born in a good family may be a scholar of many scriptures, but like a soldier without a leader or a blind man, he gets confused even in small tasks and is unable to discriminate between right and wrong.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥