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mahabharat 12.83.18: इसके बाद शुद्ध बुद्धि वाले, धन के प्रेमी, मन को वश में रखने वाले भूपाल को अपने मंत्रियों के गुण-दोषों की परीक्षा करनी चाहिए ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.83.18 
अत ऊर्ध्वममात्यानां परीक्षेत गुणागुणम्।
संयतात्मा कृतप्रज्ञो भूतिकामश्च भूमिप:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद शुद्ध बुद्धि वाले, धन के प्रेमी, मन को वश में रखने वाले भूपाल को अपने मंत्रियों के गुण-दोषों की परीक्षा करनी चाहिए ॥18॥
 
After this, Bhupal, who has a pure intellect and is a lover of wealth, who controls the mind, should examine the merits and demerits of his ministers. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)