Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.83.10: जिनका आचरण नष्ट नहीं हुआ है, जो विद्वान, सदाचारी और उत्तम व्रतों का पालन करने वाले हैं; जो अपनी इच्छित वस्तुओं के लिए सदैव आपकी प्रार्थना करते रहते हैं तथा जो श्रेष्ठ एवं सत्यनिष्ठ हैं, वे कभी आपका साथ नहीं छोड़ सकते॥10॥ | mahabharat अध्याय 12.83: सभासद् आदिके लक्षण, गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी और अनधिकारी तथा गुप्त-मन्त्रणाकी विधि एवं स्थानका निर्देश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अभिन्नवृत्ता विद्वांस: सद्वृत्ताश्चरितव्रता:।
न त्वां नित्यार्थिनो जह्युरक्षुद्रा: सत्यवादिन:॥ १०॥
अनुवाद
जिनका आचरण नष्ट नहीं हुआ है, जो विद्वान, सदाचारी और उत्तम व्रतों का पालन करने वाले हैं; जो अपनी इच्छित वस्तुओं के लिए सदैव आपकी प्रार्थना करते रहते हैं तथा जो श्रेष्ठ एवं सत्यनिष्ठ हैं, वे कभी आपका साथ नहीं छोड़ सकते॥10॥
Those whose moral conduct has not been destroyed, who are learned, virtuous and follow the best vows; who always need to pray to you for the things they desire and who are noble and truthful, they can never leave your side.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥