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mahabharat 12.82.8: घूमते-घूमते वे लोगों से कहा करते थे, 'सज्जनों! आप मुझसे वैसी विद्या (कौओं की भाषा समझने की कला) सीखिए। मैंने इसे सीखा है, इसीलिए कौवे मुझे भूत, भविष्य और वर्तमान का हाल बताते हैं।'॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.82.8 
अधीध्वं वायसीं विद्यां शंसन्ति मम वायसा:।
अनागतमतीतं च यच्च सम्प्रति वर्तते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
घूमते-घूमते वे लोगों से कहा करते थे, 'सज्जनों! आप मुझसे वैसी विद्या (कौओं की भाषा समझने की कला) सीखिए। मैंने इसे सीखा है, इसीलिए कौवे मुझे भूत, भविष्य और वर्तमान का हाल बताते हैं।'॥8॥
 
While roaming around, he used to say to people, 'Gentlemen! You should learn Vaaysi Vidya (the art of understanding the language of crows) from me. I have learnt it, that is why crows tell me about the past, the future and the present moment.'॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)