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mahabharat 12.82.68: तदनन्तर पुरोहित कुल में उत्पन्न हुए विप्रवर कालकवृक्षीय मुनि के पुनः आविर्भाव होने से राजकुल में शुभ एवं आनन्दपूर्ण उत्सव होने लगे ॥68॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  12.82.68 
ततो राजकुले नान्दी संजज्ञे भूयसा पुन:।
पुरोहितकुले चैव सम्प्राप्ते ब्राह्मणर्षभे॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर पुरोहित कुल में उत्पन्न हुए विप्रवर कालकवृक्षीय मुनि के पुनः आविर्भाव होने से राजकुल में शुभ एवं आनन्दपूर्ण उत्सव होने लगे ॥68॥
 
Thereafter, due to the re-appearance of Vipravar Kalavrikshiya Muni, who was born in the priest's family, auspicious and joyous celebrations started taking place in the royal family. 68॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)