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mahabharat 12.82.61: ऋषि बोले, "हे राजन! सबसे पहले कौए की हत्या का अपराध बताए बिना ही प्रत्येक मंत्री की शक्तियां छीनकर उन्हें दुर्बल कर दो। तत्पश्चात अपराध का कारण पता करके एक-एक करके सभी को मार डालो।"   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  12.82.61 
मुनिरुवाच
अदर्शयन्निमं दोषमेकैकं दुर्बलीकुरु।
तत: कारणमाज्ञाय पुरुषं पुरुषं जहि॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
ऋषि बोले, "हे राजन! सबसे पहले कौए की हत्या का अपराध बताए बिना ही प्रत्येक मंत्री की शक्तियां छीनकर उन्हें दुर्बल कर दो। तत्पश्चात अपराध का कारण पता करके एक-एक करके सभी को मार डालो।"
 
The sage said, "O King! First of all, without disclosing the crime of killing a crow, weaken each minister by taking away his powers. After that, find out the reason for the crime and kill each one of them one by one." 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)