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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  12.82.55 
तस्य मे रोचते राजन् क्षुधितस्येव भोजनम्।
अमात्या मे न रोचन्ते वितृष्णस्य यथोदकम्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
जैसे भूखे को भोजन अच्छा लगता है, वैसे ही मुझे आपका दर्शन अच्छा लगता है; किन्तु जैसे प्यास न होने पर जल अच्छा नहीं लगता, वैसे ही आपके ये मंत्री मुझे अच्छे नहीं लगते।
 
Just as a hungry person likes food, similarly I like seeing you; but just as water does not taste good when one is not thirsty, similarly these ministers of yours do not seem good to me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)