Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.82.53-54: क्या इस देश के राजा संयमी हैं? क्या उनके सेवक उनके अधीन रहते हैं? क्या प्रजा राजा से प्रेम करती है? और क्या राजा भी अपनी प्रजा से प्रेम करते हैं? हे राजाओं में श्रेष्ठ! मैं ये सब बातें जानने की इच्छा से आपके पास आया हूँ ॥53-54॥ | mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कच्चिज्जितेन्द्रियो राजा कच्चिदस्यान्तरा जिता:॥ ५३॥
कच्चिदेषां प्रियो राजा कच्चिद् राज्ञ: प्रिया प्रजा:।
विजिज्ञासुरिह प्राप्तस्तवाहं राजसत्तम॥ ५४॥
अनुवाद
क्या इस देश के राजा संयमी हैं? क्या उनके सेवक उनके अधीन रहते हैं? क्या प्रजा राजा से प्रेम करती है? और क्या राजा भी अपनी प्रजा से प्रेम करते हैं? हे राजाओं में श्रेष्ठ! मैं ये सब बातें जानने की इच्छा से आपके पास आया हूँ ॥53-54॥
Are the kings of this country self-controlled? Are their servants under their control? Do the subjects love the king? And do the kings also love their subjects? O best of kings! I came to you with the desire to know all these things. ॥ 53-54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥