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mahabharat 12.82.52-53h: मैं राजा के साथ रहने वाले अधिकारियों का चरित्र और स्वभाव जानना चाहता था, इसलिए मैं सदैव शंकित रहा हूँ और यहाँ बड़ी सावधानी से रहता हूँ, जैसे कोई साँपों से भरे घर में रहता हो या किसी वीर पुरुष की पत्नी के घर में प्रवेश करता हो। 52 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  12.82.52-53h 
उषितं शङ्कमानेन प्रमादं परिरक्षता।
अन्त:सर्प इवागारे वीरपत्न्या इवालये॥ ५२॥
शीलं जिज्ञासमानेन राज्ञश्च सहजीविन:।
 
 
अनुवाद
मैं राजा के साथ रहने वाले अधिकारियों का चरित्र और स्वभाव जानना चाहता था, इसलिए मैं सदैव शंकित रहा हूँ और यहाँ बड़ी सावधानी से रहता हूँ, जैसे कोई साँपों से भरे घर में रहता हो या किसी वीर पुरुष की पत्नी के घर में प्रवेश करता हो। 52 1/2
 
I wanted to know the character and nature of the officials living with the king, so I have always been suspicious and have lived here with great caution, just like someone living in a house infested with snakes or entering the house of a brave man's wife. 52 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)