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mahabharat 12.82.46: तुम मधुकोश से युक्त वृक्ष की ऊँची शाखा के समान हो, जिसके गिरने का भय रहता है। तुम विषमिश्रित अन्न के समान हो, तुम्हारा आचरण सज्जनों जैसा नहीं, अपितु अशिष्टों जैसा है। ॥46॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  12.82.46 
मधुप्रपातो हि भवान् भोजनं विषसंयुतम्।
असतामिव ते भावो वर्तते न सतामिव॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
तुम मधुकोश से युक्त वृक्ष की ऊँची शाखा के समान हो, जिसके गिरने का भय रहता है। तुम विषमिश्रित अन्न के समान हो, तुम्हारा आचरण सज्जनों जैसा नहीं, अपितु अशिष्टों जैसा है। ॥46॥
 
You are like a high branch of a tree with a honeycomb from which there is a danger of falling down. You are like food mixed with poison, your behavior is like that of ungentlemen, not like that of gentlemen. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)