Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.82.44: न्याय तो यह है कि केवल दुष्ट कर्म करने वाले को ही मारा जाए और पुण्य और श्रेष्ठ कर्म करने वाले को किसी प्रकार कष्ट न दिया जाए, परन्तु यहाँ ऐसा नहीं होता; अतः इस राज्य में किसी का भी स्थायी रूप से रहना उचित नहीं है। विद्वान् पुरुष को चाहिए कि वह शीघ्र ही इस स्थान को छोड़ दे॥ 44॥ | mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न्याय तो यह है कि केवल दुष्ट कर्म करने वाले को ही मारा जाए और पुण्य और श्रेष्ठ कर्म करने वाले को किसी प्रकार कष्ट न दिया जाए, परन्तु यहाँ ऐसा नहीं होता; अतः इस राज्य में किसी का भी स्थायी रूप से रहना उचित नहीं है। विद्वान् पुरुष को चाहिए कि वह शीघ्र ही इस स्थान को छोड़ दे॥ 44॥
The just thing is that only the person who does evil should be killed and the person who does virtuous and noble deeds should not be troubled in any way, but this does not happen here; therefore, it is not right for anyone to live permanently in this kingdom. A learned person should leave this place as soon as possible. ॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥