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mahabharat 12.82.42: तुम्हारा यह राज्य घोर अंधकार से आच्छादित और दुःखों से परिपूर्ण है। तुम स्वयं भी इस राज्य पर विश्वास नहीं कर सकते, फिर मैं कैसे करूँ?॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.82.42 
गहनं भवतो राज्यमन्धकारं तमोऽन्वितम्।
नेह विश्वसिंतु शक्यं भवतापि कुतो मया॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारा यह राज्य घोर अंधकार से आच्छादित और दुःखों से परिपूर्ण है। तुम स्वयं भी इस राज्य पर विश्वास नहीं कर सकते, फिर मैं कैसे करूँ?॥ 42॥
 
This kingdom of yours is covered in deep darkness and is full of misery. Even you yourself cannot believe in this kingdom; then how can I?॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)