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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.82.37 
तेषामहं भयाद् राजन् गमिष्याम्यन्यमाश्रमम्।
तैर्हि मे संधितो बाण: काके निपतित: प्रभो॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! मैं उन शत्रुओं के भय से दूसरे आश्रम में जा रहा हूँ। हे प्रभु! उन्होंने मेरे लिए ही बाण चलाया था, किन्तु वह उस कौवे पर ही लगा।
 
O Lord of men! I will go to another ashram out of fear of those enemies. O Lord! He had aimed the arrow for me only; but it fell on that crow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)