Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.82.36: हे राजन! जो आपको नष्ट करके आपके बाद इस राज्य को हड़पना चाहता है, वह अपने कार्य में तभी सफल हो सकता है, जब वह अन्तःपुर के सेवकों के साथ षड्यन्त्र करे; अन्यथा नहीं (अतः आपको सावधान रहना चाहिए)॥36॥ | mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो वा भवद्विनाशेन राज्यमिच्छत्यनन्तरम्।
आन्तरैरभिसंधाय राजन् सिद्धॺति नान्यथा॥ ३६॥
अनुवाद
हे राजन! जो आपको नष्ट करके आपके बाद इस राज्य को हड़पना चाहता है, वह अपने कार्य में तभी सफल हो सकता है, जब वह अन्तःपुर के सेवकों के साथ षड्यन्त्र करे; अन्यथा नहीं (अतः आपको सावधान रहना चाहिए)॥36॥
O King! The one who wants to destroy you and take over this kingdom after you, can only succeed in his act if he conspires with the servants of the inner palace; otherwise not (so you should be cautious).॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥