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mahabharat 12.82.35: जो लोग आपके खजाने को लूटकर आपके घर में रह रहे हैं, वे प्रजा का हित चाहने वाले नहीं हैं। ऐसे लोग मेरे प्रति शत्रुतापूर्ण हो गए हैं ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.82.35 
ये त्वादानपरा एव वसन्ति भवतो गृहे।
अभूतिकामा भूतानां तादृशैर्मेऽभिसंहितम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जो लोग आपके खजाने को लूटकर आपके घर में रह रहे हैं, वे प्रजा का हित चाहने वाले नहीं हैं। ऐसे लोग मेरे प्रति शत्रुतापूर्ण हो गए हैं ॥35॥
 
Those who are looting your treasury and living in your house are not those who wish well for the people. Such people have become hostile towards me. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)