Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.82.29: राजा जीवन और धन दोनों का स्वामी है। जब वह क्रोधित होता है, तो विषैले साँप के समान भयंकर हो जाता है; इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह सदैव 'मैं जीवित नहीं हूँ' ऐसा मानकर अर्थात् अपने प्राणों की बाजी लगाकर राजा की सेवा बड़े यत्न से करे। | mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा जीवन और धन दोनों का स्वामी है। जब वह क्रोधित होता है, तो विषैले साँप के समान भयंकर हो जाता है; इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह सदैव 'मैं जीवित नहीं हूँ' ऐसा मानकर अर्थात् अपने प्राणों की बाजी लगाकर राजा की सेवा बड़े यत्न से करे।
The king is the master of both life and wealth. When he is angry, he becomes as dangerous as a poisonous snake; therefore, a man should always serve the king with great diligence, assuming that 'I am not alive' i.e. taking his life at stake.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥