Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.82.28: यदि सेवक असावधानी से कोई अपराध कर दे, तो राजा पूर्व उपकार भूलकर क्रोधित होकर उससे घृणा करने लगता है। और जब राजा अपनी सीमा लाँघ जाता है, तो सेवक के बचने की कोई आशा नहीं रहती। जैसे जलती हुई आग के पास मनुष्य सावधानी से जाता है, वैसे ही शिक्षित व्यक्ति को राजा के पास सावधान रहना चाहिए।॥28॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.82.28 
प्रमादाद्धि स्खलेद् राजा स्खलिते नास्ति जीवितम्।
अग्निं दीप्तमिवासीदेद् राजानमुपशिक्षित:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
यदि सेवक असावधानी से कोई अपराध कर दे, तो राजा पूर्व उपकार भूलकर क्रोधित होकर उससे घृणा करने लगता है। और जब राजा अपनी सीमा लाँघ जाता है, तो सेवक के बचने की कोई आशा नहीं रहती। जैसे जलती हुई आग के पास मनुष्य सावधानी से जाता है, वैसे ही शिक्षित व्यक्ति को राजा के पास सावधान रहना चाहिए।॥28॥
 
If a servant commits a crime due to carelessness, the king forgets the earlier favour and becomes angry and starts hating him. And when the king crosses his limits, there is no hope left for the servant to survive. Just as a man goes cautiously near a burning fire, similarly an educated man should be cautious while near the king.॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)