Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.82.25-26: तत्त्ववेत्ता कहते हैं कि जो राजा की संगति करता है, वह विषैले सर्पों की संगति करता है। राजा के अनेक मित्र होते हैं, तो उसके अनेक शत्रु भी होते हैं। जो लोग अपनी जीविका के लिए राजा पर निर्भर रहते हैं, वे उन सबसे भयभीत रहते हैं। हे राजन! उन्हें राजा से ही सदैव भय बना रहता है॥ 25-26॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  12.82.25-26 
आशीविषैश्च तस्याहु: संगतं यस्य राजभि:।
बहुमित्राश्च राजानो बह्वमित्रास्तथैव च॥ २५॥
तेभ्य: सर्वेभ्य एवाहुर्भयं राजोपजीविनाम्।
तथैषां राजतो राजन् मुहूर्तादेव भीर्भवेत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तत्त्ववेत्ता कहते हैं कि जो राजा की संगति करता है, वह विषैले सर्पों की संगति करता है। राजा के अनेक मित्र होते हैं, तो उसके अनेक शत्रु भी होते हैं। जो लोग अपनी जीविका के लिए राजा पर निर्भर रहते हैं, वे उन सबसे भयभीत रहते हैं। हे राजन! उन्हें राजा से ही सदैव भय बना रहता है॥ 25-26॥
 
One who associates with kings, associates with poisonous snakes, says the philosophers. While a king has many friends, he also has many enemies. Those who depend on the king for their livelihood are afraid of all of them. O king! They are always in danger from the king himself.॥ 25-26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)