Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.82.24: नीतिशास्त्र के विद्वानों ने राजा के सेवकों के इस दोष का वर्णन पहले ही कर दिया है कि जो राजा की सेवा करते हैं, उनके लिए यह पापमय आजीविका जड़ गति है। अर्थात् जिन्हें कहीं से भी सहायता नहीं मिलती, वे राजा के सेवक हैं। ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.82.24 
प्रागेवोक्तस्तु दोषोऽयमाचार्यैर्नृपसेविनाम्।
अगतीकगतिर्ह्येषा पापा राजोपसेविनाम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
नीतिशास्त्र के विद्वानों ने राजा के सेवकों के इस दोष का वर्णन पहले ही कर दिया है कि जो राजा की सेवा करते हैं, उनके लिए यह पापमय आजीविका जड़ गति है। अर्थात् जिन्हें कहीं से भी सहायता नहीं मिलती, वे राजा के सेवक हैं। ॥24॥
 
The scholars of ethics have already described this fault of the king's servants that for those who serve the king, this sinful livelihood is an inert movement. That is, those who do not get support from anywhere are the servants of the king. ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)