Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.82.21-22: तब राजा ने ऋषि से इस प्रकार कहा - 'ब्राह्मण! जो कुछ तुम कहना चाहते हो, निर्भय होकर मुझसे कहो। मैं अपना कल्याण चाहने वाला तुम्हें क्यों क्षमा न करूँ? ब्राह्मण! जो कुछ तुम कहना चाहते हो, कहो। मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि तुम जो कुछ कहोगे, मैं तुम्हारी आज्ञा का पालन करूँगा।'॥ 21-22॥ | mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तंराजाप्रत्युवाचेदं यत् किंचिन्मां भवान् वदेत्।
कस्मादहं न क्षमेयमाकाङ्क्षन्नात्मनो हितम्॥ २१॥
ब्राह्मण प्रतिजाने ते प्रब्रूहि यदिहेच्छसि।
करिष्यामि हि ते वाक्यं यदस्मान्विप्र वक्ष्यसि॥ २२॥
अनुवाद
तब राजा ने ऋषि से इस प्रकार कहा - 'ब्राह्मण! जो कुछ तुम कहना चाहते हो, निर्भय होकर मुझसे कहो। मैं अपना कल्याण चाहने वाला तुम्हें क्यों क्षमा न करूँ? ब्राह्मण! जो कुछ तुम कहना चाहते हो, कहो। मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि तुम जो कुछ कहोगे, मैं तुम्हारी आज्ञा का पालन करूँगा।'॥ 21-22॥
Then the king replied to the sage in this manner—'Brahmin! Whatever you want to say, say it to me without any fear. Why would I, who wish for my own welfare, not forgive you? Brahmin! Say whatever you want. I promise that whatever you tell me, I will follow your command.'॥ 21-22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥