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mahabharat 12.82.18h: तुम मेरे मित्र हो। मैं तुम्हारे हित के लिए यहाँ आया हूँ और तुम्हारे प्रति पूर्ण श्रद्धा रखता हूँ। तुम्हारी हानि देखकर मुझे बहुत दुःख हो रहा है।॥ 17 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 18h
 
 
श्लोक  12.82.18h 
मित्रार्थमभिसंतप्तो भक्त्या सर्वात्मनाऽऽगत:।
 
 
अनुवाद
तुम मेरे मित्र हो। मैं तुम्हारे हित के लिए यहाँ आया हूँ और तुम्हारे प्रति पूर्ण श्रद्धा रखता हूँ। तुम्हारी हानि देखकर मुझे बहुत दुःख हो रहा है।॥ 17 1/2॥
 
‘You are my friend. I have come here for your benefit with all my heart's devotion towards you. I am very sad to see the loss you are facing.॥ 17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)