Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.82.18h: तुम मेरे मित्र हो। मैं तुम्हारे हित के लिए यहाँ आया हूँ और तुम्हारे प्रति पूर्ण श्रद्धा रखता हूँ। तुम्हारी हानि देखकर मुझे बहुत दुःख हो रहा है।॥ 17 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तुम मेरे मित्र हो। मैं तुम्हारे हित के लिए यहाँ आया हूँ और तुम्हारे प्रति पूर्ण श्रद्धा रखता हूँ। तुम्हारी हानि देखकर मुझे बहुत दुःख हो रहा है।॥ 17 1/2॥
‘You are my friend. I have come here for your benefit with all my heart's devotion towards you. I am very sad to see the loss you are facing.॥ 17 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥