Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.82.18-20: ‘जिस प्रकार सारथी अच्छे घोड़े को सावधान करता है, उसी प्रकार यदि कोई मित्र अपने मित्र को सावधान करने आए, जो अपने मित्र के वियोग को देखकर अत्यंत दुःखी हो और जिसे यह दुःख सहन न हो, वह सहायता करने के हठ से अपने मित्र राजा के पास आए और कहे कि ‘हे राजन! आपका यह धन चुराया जा रहा है’, तो उस बुद्धिमान एवं सदा उन्नति चाहने वाले हितैषी पुरुष को चाहिए कि वह अपने हितैषी मित्र की बात सुनकर उसका अपराध क्षमा कर दे। | mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘जिस प्रकार सारथी अच्छे घोड़े को सावधान करता है, उसी प्रकार यदि कोई मित्र अपने मित्र को सावधान करने आए, जो अपने मित्र के वियोग को देखकर अत्यंत दुःखी हो और जिसे यह दुःख सहन न हो, वह सहायता करने के हठ से अपने मित्र राजा के पास आए और कहे कि ‘हे राजन! आपका यह धन चुराया जा रहा है’, तो उस बुद्धिमान एवं सदा उन्नति चाहने वाले हितैषी पुरुष को चाहिए कि वह अपने हितैषी मित्र की बात सुनकर उसका अपराध क्षमा कर दे।
‘Just as a charioteer cautions a good horse, similarly if a friend comes to caution his friend, who is extremely sad on seeing the loss of his friend and who is unable to bear it, comes to his friend king with a stubborn intention to help him and says, “O King! This wealth of yours is being stolen”, then a wise and well-meaning man who always desires prosperity and progress should listen to his well-meaning friend and forgive his crime.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥