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mahabharat 12.82.17: हे राजन! आप प्रजा के प्राण-धन के स्वामी हैं। मैं आपसे रक्षा की प्रार्थना करता हूँ। यदि आपकी अनुमति हो, तो मैं आपके हित में एक बात कहूँगा॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.82.17 
राजंस्त्वामभयं याचे प्रभुं प्राणधनेश्वरम्।
अनुज्ञातस्त्वया ब्रूयां वचनं भवतो हितम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! आप प्रजा के प्राण-धन के स्वामी हैं। मैं आपसे रक्षा की प्रार्थना करता हूँ। यदि आपकी अनुमति हो, तो मैं आपके हित में एक बात कहूँगा॥17॥
 
‘O King! You are the master of the lives and wealth of the subjects. I request you for protection. If you permit, I will tell you something that is in your interest.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)