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mahabharat 12.82.16: प्रातःकाल ब्राह्मण ने पिंजरे में अपने कौए को बाण से बिंधा हुआ देखकर राजा क्षेमदर्शी से इस प्रकार कहा:   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.82.16 
वायसं तु विनिर्भिन्नं दृष्ट्वा बाणेन पञ्जरे।
पूर्वाह्णे ब्राह्मणो वाक्यं क्षेमदर्शिनमब्रवीत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
प्रातःकाल ब्राह्मण ने पिंजरे में अपने कौए को बाण से बिंधा हुआ देखकर राजा क्षेमदर्शी से इस प्रकार कहा:
 
Seeing his crow pierced by an arrow in the cage, the Brahmin spoke to King Kshemadarshi in the morning as follows:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)