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mahabharat 12.82.15: हे कुरुश्रेष्ठ! इस प्रकार मुनि द्वारा अपमानित होकर समस्त राजकर्मचारियों ने अँधेरी रात्रि में सोते हुए मुनि के कौवे को बाणों से घायल करके मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.82.15 
तेन विप्रकृता: सर्वे राजयुक्ता: कुरूद्वह।
तमस्यभिप्रसुप्तस्य निशि काकमवेधयन्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! इस प्रकार मुनि द्वारा अपमानित होकर समस्त राजकर्मचारियों ने अँधेरी रात्रि में सोते हुए मुनि के कौवे को बाणों से घायल करके मार डाला।
 
O best of the Kurus! In this manner all the royal officials, insulted by the sage, killed the crow of the sage while he was sleeping in the dark night by piercing it with arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)