Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.82.14: इसी प्रकार राजा के खजाने से चोरी करने वाले अन्य कर्मचारियों से भी ऋषि ने कहा - 'तुमने चोरी की है। मेरे इस कौवे की कही कोई बात कहीं भी झूठी नहीं सुनी गई।'॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथान्यानपि स प्राह राजकोशहरांस्तदा।
न चास्य वचनं किंचिदनृतं श्रूयते क्वचित्॥ १४॥
अनुवाद
इसी प्रकार राजा के खजाने से चोरी करने वाले अन्य कर्मचारियों से भी ऋषि ने कहा - 'तुमने चोरी की है। मेरे इस कौवे की कही कोई बात कहीं भी झूठी नहीं सुनी गई।'॥14॥
In the same way, the sage said to the other employees who had stolen from the king's treasury - 'You have stolen. Nothing said by this crow of mine has ever been heard to be false anywhere.'॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥