Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.82.10-11: उस राष्ट्रके सम्पूर्ण व्यापारोंको जानकर तथा राजसेवकोंद्वारा राजाके धनकी चोरीकी सब घटनाओंको अनेक स्थानोंसे ज्ञात करके, उत्तम व्रतोंका पालन करनेवाले वे महामुनि अपनेको सर्वज्ञ कहकर उस कौएके साथ राजासे मिलने आये॥10-11॥ | mahabharat अध्याय 12.82: मन्त्रियोंकी परीक्षाके विषयमें तथा राजा और राजकीय मनुष्योंसे सतर्क रहनेके विषयमें कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स बुद्ध्वा तस्य राष्ट्रस्य व्यवसायं हि सर्वश:।
राजयुक्तापहारांश्च सर्वान् बुद्ध्वा ततस्तत:॥ १०॥
तत: स काकमादाय राजानं द्रष्टुमागमत्।
सर्वज्ञोऽस्मीति वचनं ब्रुवाण: संशितव्रत:॥ ११॥
अनुवाद
उस राष्ट्रके सम्पूर्ण व्यापारोंको जानकर तथा राजसेवकोंद्वारा राजाके धनकी चोरीकी सब घटनाओंको अनेक स्थानोंसे ज्ञात करके, उत्तम व्रतोंका पालन करनेवाले वे महामुनि अपनेको सर्वज्ञ कहकर उस कौएके साथ राजासे मिलने आये॥10-11॥
Having learned about all the businesses of that nation and having found out from various places about all the incidents of theft of the king's wealth by the royal servants, that great sage who observed the best vows, declaring himself to be omniscient, came to meet the king along with that crow.॥ 10-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥