Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.81.8: हे नारद! अंधक और वृष्णि कुल में और भी बहुत से शूरवीर पुरुष हैं, जो अत्यंत भाग्यशाली, बलवान और वीर हैं; वे सभी सदैव परिश्रमी रहते हैं॥8॥ | mahabharat अध्याय 12.81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्ये हि सुमहाभागा बलवन्तो दुरुत्सहा:।
नित्योत्थानेन सम्पन्ना नारदान्धकवृष्णय:॥ ८॥
अनुवाद
हे नारद! अंधक और वृष्णि कुल में और भी बहुत से शूरवीर पुरुष हैं, जो अत्यंत भाग्यशाली, बलवान और वीर हैं; वे सभी सदैव परिश्रमी रहते हैं॥8॥
O Narada! There are many other valiant men in the Andhaka and Vrishni clans who are extremely fortunate, strong and brave; all of them are always industrious. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥