Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.81.6: देवर्षे! जैसे अग्नि प्रकट करने की इच्छा रखने वाला मनुष्य अरणी की लकड़ी को मथता है, वैसे ही इन स्वजनों के कटु वचन मेरे हृदय को सदैव मथते और जलाते रहते हैं॥6॥ | mahabharat अध्याय 12.81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवर्षे! जैसे अग्नि प्रकट करने की इच्छा रखने वाला मनुष्य अरणी की लकड़ी को मथता है, वैसे ही इन स्वजनों के कटु वचन मेरे हृदय को सदैव मथते और जलाते रहते हैं॥6॥
Devarshe! Just as a man who wishes to manifest fire churns the wood of Arani, similarly the bitter words of these relatives always churn and burn my heart. 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥