Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.81.4: हे स्वर्ग में विचरण करने वाले नारद! मैं आपकी सद्भावना पर भरोसा करके आपसे निवेदन करूँगा। मनुष्य किसी व्यक्ति की बुद्धि और बल की सम्पूर्णता देखकर ही उससे कुछ पूछता है या जिज्ञासा प्रकट करता है॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स ते सौहृदमास्थाय किञ्चिद् वक्ष्यामि नारद।
कृत्स्नं बुद्धिबलं प्रेक्ष्य सम्पृच्छेस्त्रिदिवंगम॥ ४॥
अनुवाद
हे स्वर्ग में विचरण करने वाले नारद! मैं आपकी सद्भावना पर भरोसा करके आपसे निवेदन करूँगा। मनुष्य किसी व्यक्ति की बुद्धि और बल की सम्पूर्णता देखकर ही उससे कुछ पूछता है या जिज्ञासा प्रकट करता है॥4॥
O Narada who roams in heaven! I will make a request to you trusting in your good faith. A person asks something or expresses curiosity to a person only after seeing the completeness of his intelligence and strength.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥