Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.81.28: हे प्रभु! संधि, विग्रह, यान, आसन, द्वैधिभाव और समाश्रय - इन छह गुणों का उचित समय पर प्रयोग करके शत्रु पर आक्रमण करने के लिए प्रयाण करने से वर्तमान या भविष्य में क्या फल होगा? यह सब आपसे छिपा नहीं है। 28॥ | mahabharat अध्याय 12.81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आयत्यां च तदात्वे च न तेऽस्त्यविदितं प्रभो।
षाड्गुण्यस्य विधानेन यात्रायानविधौ तथा॥ २८॥
अनुवाद
हे प्रभु! संधि, विग्रह, यान, आसन, द्वैधिभाव और समाश्रय - इन छह गुणों का उचित समय पर प्रयोग करके शत्रु पर आक्रमण करने के लिए प्रयाण करने से वर्तमान या भविष्य में क्या फल होगा? यह सब आपसे छिपा नहीं है। 28॥
Lord! Sandhi, Vigraha, Yana, Asana, Dvaidhibhava and Samashraya - what will be the result in the present or future by using these six qualities at the right time and traveling to attack the enemy? All this is not hidden from you. 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥