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mahabharat 12.81.27: श्री कृष्ण! तुम्हारा पक्ष सदैव ऐसी उन्नति करे जिससे तुम्हारा धन, यश और आयु बढ़े तथा तुम्हारे कुल का कोई भी सदस्य नष्ट न हो। यह सब तुम यथाशक्ति करो॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 12.81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.81.27 
धन्यं यशस्यमायुष्यं स्वपक्षोद्भावनं सदा।
ज्ञातीनामविनाश: स्याद् यथा कृष्ण तथा कुरु॥ २७॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! तुम्हारा पक्ष सदैव ऐसी उन्नति करे जिससे तुम्हारा धन, यश और आयु बढ़े तथा तुम्हारे कुल का कोई भी सदस्य नष्ट न हो। यह सब तुम यथाशक्ति करो॥ 27॥
 
Sri Krishna! Your side should always progress in a way that increases your wealth, fame and longevity and does not destroy any of your family members. Do all this in whatever way possible.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)