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mahabharat 12.81.25: केशव! आप इस यादव संघ के प्रधान हैं। यदि इसमें फूट पड़ गई, तो यह सम्पूर्ण संघ नष्ट हो जाएगा; अतः आप ऐसा कुछ करें जिससे आपको पाकर यह संघ - यह यादव गणराज्य राज्य नष्ट न हो जाए॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 12.81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.81.25 
भेदाद् विनाश: संघानां संघमुख्योऽसि केशव।
यथा त्वां प्राप्य नोत्सीदेदयं संघस्तथा कुरु॥ २५॥
 
 
अनुवाद
केशव! आप इस यादव संघ के प्रधान हैं। यदि इसमें फूट पड़ गई, तो यह सम्पूर्ण संघ नष्ट हो जाएगा; अतः आप ऐसा कुछ करें जिससे आपको पाकर यह संघ - यह यादव गणराज्य राज्य नष्ट न हो जाए॥ 25॥
 
Keshav! You are the head of this Yadav Sangha. If there is a split in it, then this entire Sangha will be destroyed; therefore you should do something so that after getting you, this Sangha - this Yadava Republic State, does not get destroyed.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)