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mahabharat 12.81.17: श्री कृष्ण! औरों की तो बात ही छोड़िए, आप भी इतने शक्तिशाली होकर भी भाइयों में फूट पड़ने के भय से अक्रूर और उग्रसेन के हाथ में गया राज्य वापस नहीं ले सकते।   |   mahabharat अध्याय 12.81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.81.17 
बभ्रूग्रसेनयो राज्यं नाप्तुं शक्यं कथंचन।
ज्ञातिभेदभयात् कृष्ण त्वया चापि विशेषत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! औरों की तो बात ही छोड़िए, आप भी इतने शक्तिशाली होकर भी भाइयों में फूट पड़ने के भय से अक्रूर और उग्रसेन के हाथ में गया राज्य वापस नहीं ले सकते।
 
Sri Krishna! Forget about others, even you, being so powerful, cannot take back the kingdom that has gone into the hands of Akrur and Ugrasena, for fear of division among the brothers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)