Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.81.16: हे श्रीकृष्ण! हे सहायक! इस समय उग्रसेन को दिया गया धन दृढ़ हो गया है। उसकी जाति के लोग भी उग्रसेन की सहायता कर रहे हैं; अतः थूके हुए अन्न के समान तुम दिया हुआ धन वापस नहीं ले सकते॥16॥ | mahabharat अध्याय 12.81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृतमूलमिदानीं तज्ज्ञातिवृन्दं सहायवन्।
न शक्यं पुनरादातुं वान्तमन्नमिव त्वया॥ १६॥
अनुवाद
हे श्रीकृष्ण! हे सहायक! इस समय उग्रसेन को दिया गया धन दृढ़ हो गया है। उसकी जाति के लोग भी उग्रसेन की सहायता कर रहे हैं; अतः थूके हुए अन्न के समान तुम दिया हुआ धन वापस नहीं ले सकते॥16॥
O Lord Krishna, O helper! At this time, the wealth given to Ugrasen has become firmly established. The people of his caste are also helping Ugrasen; hence, like the food that has been spat out, you cannot take back the wealth given.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥