Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.81.14: अक्रूर और आहुका के द्वारा जो यह दुःखदायी विपत्ति तुम पर आई है, वह आंतरिक है और तुम्हारे ही कर्मों के कारण प्रकट हुई है। जिन लोगों के नाम तुमने बताए हैं, वे सब तुम्हारे ही वंश के हैं॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अक्रूर और आहुका के द्वारा जो यह दुःखदायी विपत्ति तुम पर आई है, वह आंतरिक है और तुम्हारे ही कर्मों के कारण प्रकट हुई है। जिन लोगों के नाम तुमने बताए हैं, वे सब तुम्हारे ही वंश के हैं॥14॥
This painful calamity which has befallen you, caused by Akrura and Aahuka, is internal and has appeared due to your own deeds. All those whose names you have mentioned are from your own lineage.॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥