Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.81.11: श्रीमान्, जिस प्रकार दो जुआरियों की माता एक की विजय की कामना करती है और दूसरे की पराजय की कामना नहीं करती, उसी प्रकार मैं भी इन दोनों मित्रों में से एक की विजय की कामना करता हूँ और दूसरे की पराजय की कामना नहीं करता। | mahabharat अध्याय 12.81: कुटुम्बीजनोंमें दलबंदी होनेपर उस कुलके प्रधान पुरुषको क्या करना चाहिये? इसके विषयमें श्रीकृष्ण और नारदजीका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीमान्, जिस प्रकार दो जुआरियों की माता एक की विजय की कामना करती है और दूसरे की पराजय की कामना नहीं करती, उसी प्रकार मैं भी इन दोनों मित्रों में से एक की विजय की कामना करता हूँ और दूसरे की पराजय की कामना नहीं करता।
Sir, just as the mother of two gamblers wishes for the victory of one and does not wish for the defeat of the other, similarly, I too wish for the victory of one of these two friends and do not wish for the defeat of the other.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥