Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.80.39: उन पर विश्वास न भी किया जाए; परन्तु उनके साथ सदैव विश्वासी जैसा व्यवहार करना चाहिए। उनमें कोई दोष है या गुण, इसका निर्णय करने की आवश्यकता नहीं प्रतीत होती ॥39॥ | mahabharat अध्याय 12.80: राजाके लिये मित्र और अमित्रकी पहचान तथा उन सबके साथ नीतिपूर्ण बर्तावका और मन्त्रीके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विश्वस्तवदविश्वस्तस्तेषु वर्तेत सर्वदा।
न हि दोषो गुणो वेति निरूप्यस्तेषु दृश्यते॥ ३९॥
अनुवाद
उन पर विश्वास न भी किया जाए; परन्तु उनके साथ सदैव विश्वासी जैसा व्यवहार करना चाहिए। उनमें कोई दोष है या गुण, इसका निर्णय करने की आवश्यकता नहीं प्रतीत होती ॥39॥
One may not trust them; but one should always behave with them as one who trusts. There does not seem to be any need to judge whether they have any faults or virtues. ॥39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥