श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 80: राजाके लिये मित्र और अमित्रकी पहचान तथा उन सबके साथ नीतिपूर्ण बर्तावका और मन्त्रीके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.80.34 
अज्ञातिनोऽपि न सुखा नावज्ञेयास्तत: परम्।
अज्ञातिमन्तं पुरुषं परे चाभिभवन्त्युत॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जिसके परिवार या सम्बन्धी नहीं हैं, वह व्यक्ति भी सुखी नहीं रहता; इसलिए परिवार के सदस्यों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। जिसके भाई या सम्बन्धी नहीं हैं, वह दूसरों द्वारा प्रताड़ित होता है ॥ 34॥
 
A person who does not have family or relatives is also not happy; therefore one should not ignore family members. A person who does not have brothers or relatives is oppressed by others. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)