श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 80: राजाके लिये मित्र और अमित्रकी पहचान तथा उन सबके साथ नीतिपूर्ण बर्तावका और मन्त्रीके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.80.32 
ज्ञातिभ्यश्चैव बुद्धॺेथा मृत्योरिव भयं सदा।
उपराजेव राजर्धिं ज्ञातिर्न सहते सदा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जिस प्रकार लोग मृत्यु से डरते हैं, उसी प्रकार तुम्हें भी अपने कुल-जनों से सदैव भयभीत रहना चाहिए। जिस प्रकार पड़ोसी राजा अपने राजा की उन्नति नहीं देख सकता, उसी प्रकार एक कुल-जन दूसरे कुल-जन की उन्नति सहन नहीं कर सकता। 32.
 
Yudhishthira! You should always fear your family members in the same way people fear death. Just as a neighbouring king cannot see the progress of his king, similarly a family member cannot tolerate the rise of another family member. 32.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd