श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 80: राजाके लिये मित्र और अमित्रकी पहचान तथा उन सबके साथ नीतिपूर्ण बर्तावका और मन्त्रीके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.80.3 
भीष्म उवाच
चतुर्विधानि मित्राणि राज्ञां राजन् भवन्त्युत।
सहार्थो भजमानश्च सहज: कृत्रिमस्तथा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, 'हे राजन! राजा के सहायक या मित्र चार प्रकार के होते हैं - 1- सहायक, 2- भजमान, 3- सहजन और 4- कृत्रिम।
 
Bhishma said, 'O King! The king's helpers or friends are of four kinds - 1- Sahaarth (helpers), 2- Bhajman (devotees), 3-Sahajan (natural) and 4-artificial.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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