Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.80.25: एक कार्य के लिए एक ही व्यक्ति को नियुक्त किया जाना चाहिए, दो या तीन को नहीं; क्योंकि वे एक-दूसरे को बर्दाश्त नहीं कर सकते; एक कार्य के लिए नियुक्त कई लोगों के बीच लगभग हमेशा मतभेद होता है। | mahabharat अध्याय 12.80: राजाके लिये मित्र और अमित्रकी पहचान तथा उन सबके साथ नीतिपूर्ण बर्तावका और मन्त्रीके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नैव द्वौ न त्रय: कार्या न मृष्येरन् परस्परम्।
एकार्थे ह्येव भूतानां भेदो भवति सर्वदा॥ २५॥
अनुवाद
एक कार्य के लिए एक ही व्यक्ति को नियुक्त किया जाना चाहिए, दो या तीन को नहीं; क्योंकि वे एक-दूसरे को बर्दाश्त नहीं कर सकते; एक कार्य के लिए नियुक्त कई लोगों के बीच लगभग हमेशा मतभेद होता है।
Only one person should be appointed for one task, not two or three; because they cannot tolerate each other; there is almost always a difference of opinion among many people appointed for one task.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥